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Tuesday, December 12th, 2017 11:48 PM
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नोटबंदी से देश तो हारा किंतु सरकार जीत गई




नोटबंदी से देश तो हारा किंतु सरकार जीत गईPolitics

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नोटबंदी पर हालिया रिपोर्ट आने के बाद वह फिर चर्चा का विषय बन गई। इसका देश पर क्या असर हुआ, जीडीपी पर क्या असर हुआ, कालाधन जो अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाना था वह फिर सफेद बनकर चलन में बरकरार रहा। नोटबंदी को सही साबित करने के लिए जो भी कारण दिखाए गए थे वे सभी गलत साबित हुए। ना महंगाई कम हुई, ना भ्रष्टाचार कम हुआ, ना बेरोजगारी कम हुई। उल्टा देश के देशवासियों की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब ही हो रही है। अब तो जनता आईसीयू की स्थिति में आ चुकी है। उसकी तो यह ताकत भी नहीं बची है कि वो अपने लिए आवाज उठा सके किंतु इन सबके बावजूद एक पहलू ये भी है कि सरकार जीत गई। नोटबंदी उनके लिए वरदान साबित हो गई। सरकार मतलब, भारतीय जनता पार्टी मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी जीत गए और किसी चक्रवर्ती सम्राट के अश्वमेघ यज्ञ की तरह विजय पर विजय प्राप्त करते नज़र आ रहे हैं। यूपी, बिहार, गोवा सिक्किम जैसे राज्य एक-एक कर उनके पास आते जा रहे हैं।

माननीय मोदीजी जब प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने कहा था कि ‘‘मैं 15 वर्षों तक तो नहीं हटूंगा।’’ उस समय उनका यह कथन अतिश्योक्ति नज़र आ रहा था किंतु लगता है यह सही साबित हो रहा है। उनकी दूरदृष्टि काम कर रही है। जिस प्रकार विपक्ष खत्म सा नज़र आ रहा है या यूं कहे कि मोदीजी और उनके सेनापति अमित शाह विपक्ष को एक-एक करके खत्म करने में लगे हैं उससे तो यही नज़र आ रहा है कि आगे भी किसी परिवर्तन की उम्मीद नहीं के बराबर है। जनता वैसे ही मर रही है, उसकी कमर टूट चुकी है। सरकार-अफसर-भ्रष्टाचार ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। अब कोई विरोध नहीं, कोई विपक्ष नहीं बस ‘‘मैं ही मैं’’ की गूंज सुनाई पड़ रही है।

नोटबंदी और अब जीएसटी को लेकर हमारे मौन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जो भी आशंकाएं थी वे सही साबित हो रही हैं। आज फिर देश उनको और उनके राज को याद कर रहा है, ‘मौन’ और ‘वाचाल’ में अंतर समझ रहा है किंतु अब कुछ नहीं हो सकता। पूर्व प्रधानमंत्री एक अच्छे और कुशल अर्थशास्त्री है किंतु राजनीतिज्ञ नहीं, बस यहीं मात खा गए। जो अनुभवी कांग्रेस पार्टी थी वो राज करना तो जानती थी किंतु राजनीति करना नहीं, वह एक बालमन के आगे पिट गई। शेष विपक्ष व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं के आगे क्षेत्रिय होकर एक-एक कर पिटता रहा। पूरा सीन किसी चक्रवर्ती सम्राट के अश्वमेघ यज्ञ की तरह है जिसकी आंधी में विपक्ष एक-एक करके या तो झुकता गया या टूटता गया। कुल मिलाकर आम जनता की टूटती कमर, विपक्ष का खत्म होना देश के लिए घातक बन गया, किंतु माननीय प्रधानमंत्री जी को चक्रवर्ती सम्राट बना दिया, उनको जिता दिया। अंततः जनता हारी, सरकार जीती।

इस संदर्भ में दिनांक 9 नवंबर 2016 को प्रकाशित किया गया हमारा एडिटोरियल ‘‘आम आदमी की कमर तोड़ देगा मोदी का दंभ’’ अक्षर सः अक्षर सच साबित हुआ, जिसे आप नीचे दी लिंक द्वारा अवश्य पढ़ सकते हैं।

इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ें आर्टिकल :-  आम आदमी की कमर तोड़ देगा मोदी का दम्भ 

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