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Tuesday, December 12th, 2017 11:40 PM
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देवीपूजा की आड़ में होती है एक ऐसी प्रथा जिसे देखकर शर्म भी शर्मा जाए




देवीपूजा की आड़ में होती है एक ऐसी प्रथा जिसे देखकर शर्म भी शर्मा जाएArt & Culture

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वैसे तो हमारे देश का इतिहास बहुत महान रहा है लेकिन इसकी महानता की आड़ में कुछ ऐसी प्रथाएं भी पनपती रहीं जो समाज के लिए और खासकर महिलाओं के लिए अभिशाप साबित हुईं. ऐसे ही एक प्रथा है ‘देवदासी प्रथा’ जो दक्षिण भारत के मंदिरों में अभी भी मनाई जाती है.

आप को जानकर हैरानी होगी कि इस प्रथा में नवरात्रि के समय देवियों के रूप में उन लड़कियों की पूजा करने की परंपरा है, जिन्हें अभी तक पीरिएड्स न आए हो. खास बात यह है कि लड़कियों को दुल्हन के कपड़ों में सजाकर मंदिर में बैठाया जाता है, बाद में उनके कपड़े उतरवा लिए जाते हैं, इतना ही नहीं पूजा होने के बाद इन्हें मंदिर के पुजारी के साथ 15 दिन तक इसी हाल में रहना होता है.

विशेष तौर पर यह प्रथा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं पश्चिम भारत में प्रचलित है. हांलाकि इस प्रथा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने घिनौना करार दिया है. इतना ही नहीं इस प्रथा को 1988 में गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है. सोमवार को प्रकाशित एनएचआरसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु के मदुरै में नवरात्र के समय देवियों के रूप में उन लड़कियों की पूजा करने की परंपरा है, जिन्हें अभी तक पीरिएड्स न आए हो.

इस रस्म को निभाने का तरीका बहुत खराब है. यहां लड़कियों को धर्म के नाम पर सेक्स के लिए समर्पित कर दिया जाता है. इन्हें सार्वजनिक संपत्ति समझी मानी जाती है. ऐसा माना जाता है कि इनका यौन शोषण करने की सबको छूट है. इतना ही नहीं यहां की लड़कियों को परिवार के साथ रहने और शिक्षा हासिल करने की अनुमति भी नहीं दी जाती है, उन्हें जबरन मंदिरों में रहने के लिए भेज दिया जाता है.

बताया जाता है कि यह त्यौहार 15 दिनों तक चलता है. वही तमिलनाडु सरकार ने इस प्रथा के रूप में लड़कियों के यौन शोषण के आरोपों से इनकार किया है. मदुरै के डीएम वीरा राव ने कहा कि चाइल्ड प्रोटेक्शन टीम ने मंदिर का दौरा किया है. वहां लड़कियों की देखभाल के लिए उनके माता-पिता हैं. इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि यह प्रथा 200 साल पुरानी है. अभी तक इस प्रथा के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है.

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