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15/01/2018

राजनैतिक पार्टियों की हुई हार, ‘नोटा’ हुआ असरदार




राजनैतिक पार्टियों की हुई हार, ‘नोटा’ हुआ असरदारPolitics

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गुजरात हो या हिमाचल प्रदेश, अभी हाल ही में हुए दोनों राज्यों के चुनाव में बीजेपी ने जीत का जश्न मनाया। वहीं कांग्रेस ने भी भले ही हिमाचल राज्य को खोया किंतु गुजरात में मिले जन सर्मथन व बढ़ती सीट ने उसमें उत्साह का संचार कर दिया। सभी खुशियां मना रहे हैं। कांग्रेस समझती है जनता ने उन्हें अच्छे कार्यों, अच्छी पार्टी के रूप में चुना है किंतु वह गलत समझती है। निश्चित तौर पर बीजेपी सरकार की नाकामयाबी, नोटबंदी, जीएसटी की वजह से उन्हें भी वोट मिले जो उनके परंपरागत वोट बैंक के साथ थे। जिन्होंने उन्हें खुशी मनाने का मौका दिया।

वहीं बीजेपी ने जैसे-तैसे अपनी सरकार बचा ली। कैसे बची? उससे कोई मतलब नहीं। फिर चाहे विपक्ष का कमजोर होना हो या वर्तमान में उनकी सरकार राज्य और केंद्र दोनों में होना काम आया हो या फिर उनका चुनाव प्रबंधन काम में आया हो। जीत के बाद इन सबके कोई मायने नहीं है। हम सीना तानकर खुशी मना सकते हैं। नोटबंदी को व जीएसटी को सही ठहरा सकते हैं।

इस पूरे चुनाव में ‘नोटा’ एक बड़े फैक्टर के रूप में प्रभावी ढंग से सामने आया है। गुजरात में 1.8 प्रतिशत वोट शेयर लाकर 5,51,615 वोट नोटा में गिरे हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश में 0.9 प्रतिशत वोट शेयर लाकर 34,232 वोट गिरे हैं, जो बड़ी बात है। वैसे देखा जाए तो जबसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से चुनाव में ‘नोटा’ शामिल हुआ है दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है जबकि सरकार द्वारा इसका कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता। ‘नन ऑफ दी अबॉव’ यानि नोटा सभी पार्टियों की कमज़ोरी या नाकामयाबी का सबूत। जिसे कोई भी पसंद ना हो वो वोट तो डाले किंतु अपनी नाराजगी पार्टी या व्यक्ति के प्रति के चलते जाहिर करने का सबसे बढ़िया तरीका। सरकार की इसके प्रति तमाम बेपरवाही के बावजदू जनता की ओर से बढ़ता प्रतिशत जनता का सभी पार्टियों व राजनैतिक हस्तियों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करता है साथ ही साथ सरकार की योजनाओं, काम करने के तरीकों इत्यादि के प्रति अपनी असहमति को भी दर्शाता है इसलिए बीजेपी को भी नोटबंदी या जीएसटी या अन्य कोई योजना और उसकी कार्यविधि को जनता का असर्मथन ही समझना चाहिए।

उन्हें जीत भले ही मिल गई हो किंतु जनता की उनके प्रति नाराजगी एक हकीकत है। विपक्ष का कमजोर होना उनके काम आ गया। वहीं कांग्रेस को भी अपनी हकीकत समझ लेना चाहिए। उनका कमजोर होना, पूर्व की सरकारों की कार्यविधि व भ्रष्टाचार के प्रति जनता की बेरूखी उन्हें रसातल में ले आई। वर्तमान में जितनी भी सीटें उन्हें मिली वह वर्तमान बीजेपी सरकार की गलतियों की वजह से मिली। वरना जनता ने तो ‘नोटा’ के माध्यम से अपनी नाराजगी प्रकट कर ही दी है। ऐसे ही शेष पार्टियों या व्यक्तियों के प्रति रहा।

जहां तक वर्तमान में यदि सिर्फ गुजरात के आंकड़े ही देखे जाएं तो आपको साफ नज़र आ जाएगा। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार हम उन सीटों की स्थिति आपके सामने रख रहे हैं जहां जीत के अंतर से भी ज़्यादा वोट ‘नोटा’ को मिले। ये करीब 33 सीटों का हिसाब है जबकि कम से कम 20 सीटें ऐसी भी हैं जहां जीत के अंतर से कुछ कम वोट ‘नोटा’ को मिले जो हजारों में हैं। ये आंकड़े आपके सामने उपलब्ध हैं।

No. Place BJP Congress Other Difference NOTA
1 Batod 79623 78717 904 1334
2 Chota Udaipur 74048 75141 1093 5870
3. Dabhoi 77945 75106 2839 3046
4. Dangs 57052 57820 768 2184
5. Dasda 70281 74009 3728 3796
6. Deedar 79460 80432 972 2988
7. Dhaneva 80816 82909 2093 3241
8. Dholka 71530 71203 327 2347
9. Fatepura 60250 57539 2711 4573
10. Garidhar 50635 48759 1876 1557
11. Godhra 75149 74891 258 3050
12. Himatnagar 94340 92628 1712 3334
13. Jamjodhpur 61697 64212 2518 3214
14. Jetpur 74649 77701 3052 6155
15. Kaprada 92830 93000 170 3868
16. Karjan 70523 74087 3564 2855
17. Khambhat 71459 69141 23158 2731
18. Lunawada   47093 51898 3200 3419
19. Mansa 77378 77908 524 3000
20. Matar 81509 79103 2406 4090
21 Modasa 81771 83411 1640 3681
22. Morbi 85977 89396 3419 3069
23. Morva Hadaf 54147   58513 4366 4962
24. Porbandar 72430 70575 1855 3433
25. Prantji 83482 80931 2551 2907
26. Rajkot Rural 92114 89935 2179 2559
27. Sojitra 70035 72423 2388 3112
28. Talaja 65083 66852 1769 2918
29. Umreth 68326 66443 1883 3710
30. Vagra 72326 71162 1164 1280
31. Vijapur 72326 71162 1164 1280
32. Visnagar 77496 74627 2279 2992
33. Wankaner 71227 72588 1361 3170

अब इन आंकड़ों से सभी पार्टियों और राजनीति करने वालों को समझ आ जाना चाहिए कि वे क्या कर रहे हैं? कैसे कर रहे हैं? और किस तरह के लोगों को उन्होंने शामिल किया है? ये नोटा उनकी हकीकत को बताने वाला आईना है। इसका जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, जनता को इसके बारे में पता चलेगा यह उतना ही सार्थक और सटीक होगा। वर्तमान में हम नज़र डालते हैं तो हमारे देश की संसद में ही 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत लोग दागी, क्रिमिनल नेचर के हैं जिन पर कई केसेस चल रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिन पर क्राइम के गंभीर चार्ज भी लगे हैं। यदि ऐसे लोग देश की बागडोर संभालेंगे, कानून बनाएंगे तो देश का क्या हश्र होगा, समझ सकते हैं। समाज, धर्म, गुंडागर्दी आदि के द्वारा राजनीति करने वाली इस गंदगी को दूर करना जरूरी है।

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