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Wednesday, August 15th, 2018 01:52 PM
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जिन्दगी की जंग लड़ रहे “करूणानिधि” के लिए 24 घंटे अहम, 14 की उम्र में छोड़ दिया था घर




जिन्दगी की जंग लड़ रहे “करूणानिधि” के लिए 24 घंटे अहम, 14 की उम्र में छोड़ दिया था घरPolitics



चेन्न्ई के कावेरी अस्पताल में जिन्दगी की जंग लड़ रहे डीएमके प्रमुख एम करूणानिणि की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 94 वर्षीय करूणानिधि की हालत बिगडऩे के बाद डीएमके समर्थक एक बार फिर हजारों की संख्या में अस्पताल में बाहर जमा हो गए हैं और उनकी सलामती की दुआओं का दौर भी यहां जारी है।

कावेरी अस्पताल के अनुसार करूणनिधि के लिए अगले 24 घंटे काफी अहम हैं। वे डॉक्टर्स की निगरानी में हैं और मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है। बता दें कि वे पिछले दस दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं।  बता दें कि डीएमके अध्यक्ष करूणानिणिर अपनी बीमारी के चलते पिछले दो सालों से कहीं नहीं देखे गए हैं। उनकी तबीयत 2016 से ही खराब चल रही है। दक्षिण की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाते हुए उन्होंने शुक्रवार को ही बतौर पार्टी अध्यक्ष 50 साल पूरे कर लिए हैं।

कभी नहीं हारे कोई चुनाव-

दक्षिण भारत की राजनीति में करूणानिणि सबसे चर्चित चेहरा हैं। पहली बार 1969 में उन्होंने तमिलनाडु के सीएम पद की शपथ ली थी। तब से लेकर अब तक वे कभी सत्ता में रहे तो कभी विपक्ष में। लेकिन लोगों में उनकी छवि हमेशा प्रभावशील बनी रही। उन्होंने 2003 में आखिरी बार तमिलनाडु के सीएम पद की शपथ ली थी। 1957 में हुए चुनाव में वो पहली बार विधायक चुने गए। 1967 के चुनावों में पार्टी ने बहुमत हासिल किया और अन्नादुराई तमिलनाडु के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। अपने 60 साल के राजनीतिक करियर में करुणानिधि 12 बार विधानसभा सदस्य रहे हैं। अभी तक वह जिस भी सीट पर चुनाव लड़े हैं, उन्होंने हमेशा जीत दर्ज की है। उनके समर्थक उन्हें प्यार से ‘कलाईनार’ कहकर बुलाते हैं।

की थीं तीन शादियां-

करूणानिधि ने तीन शादियां की। पहली शादी पद्मावती से, दूसरी का नाम दयालु अम्माल और और तीसरी पत्नी का रजति अम्माल था। पहली पत्नी का निधन हो चुका है, जबकि दूसरी और तीसरी पत्नी अभी जीवित हैं।

14 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर-

करूणानिणि को शुरू से ही राजनीति में दिलचस्पी थी, जिसके लिए उन्होंने 14 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था। 1937 में जब स्कूलों में हिंदी को जरूरी कर दिया गया तब करूणानिधि ने भारत में हिंदी के विरोध पर हिंदी हटाओ आंदोलन में भाग लिया था। इसके बाद उन्होंने तमिल भाषा में ही नाटक, अखबार और फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखीं। तमिल भाषा के प्रति उनकमा मोह देखतमे हुए पेरियर और अन्नादुरई ने उन्हें कुदियारासु का संपादक बना दिया था।

म्यूजियम में बदल गया है घर-

करूणानिधि का जन्म 1924 में थिरूक्कुवालई गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम दक्षिणमूर्ति था। वर्तमन में करूणानिधि के घर को म्यूजियम का रूप दे दिया गया है। उनके इस घर में पोप से लेकर इंदिरा गांधी तक की तस्वीरें लगी हैं।

घिरे रहे विवादों में भी-

बड़ी हस्ती का विवादों में घिरे रहना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन करूणनिधि ने हिंदू धर्म की आस्था को ठेस पहुंचाते हुए भगवान राम का अपमान किया था। उन्होंने हिन्दुओं के आराध्य भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा था कि , ‘लोग कहते हैं कि 17  लाख साल पहले कोई शख्स था, जिसका नाम राम था। कौन हैं वो राम? वो किस इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट थे? क्या इस बात का कोई सबूत है कि सेतुसमुद्रम का निर्माण उसी ने कराया था?’ उनके इस बयान के बाद खासा बवाल हुआ था और लोगों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।

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