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Thursday, August 16th, 2018 05:55 AM
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Happy B’day Dilip Sardesai : इनकी बदौलत ही दुनिया में नाम कमा रहा है भारतीय क्रिकेट




Happy B’day Dilip Sardesai : इनकी बदौलत ही दुनिया में नाम कमा रहा है भारतीय क्रिकेटSports



भारत के महान क्रिकेटर दिलीप सरदेसाई का आज 78वां जन्मदिन है। इसा मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। दिलीप सरदेसाई क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा नाम था, जिसके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं था। भाग्यवश भारत को एक ऐसा सितारा खिलाड़ी मिला, जिसकी बदौलत भारतीय क्रिकेट नाम का नाम पूरी दुनिया में रोशन हो सका और टीम अपने पैरों पर खड़ी हो सकी।

जी हां, माना जाता है कि उनकी शानदार पारियों के कारण ही भारत 1971 में अपने पैरों पर खड़ा होना सीख पाया था। स्पिनरों के खिलाफ उन्हें देश का सबसे बेहतर बल्लेबाज माना जाता है। 8 अगस्त 1940 में जन्मे दिलीप सरदेसाई का जन्म गोवा में हुआ। सरदेसाई ने क्रिकेट खेलने की शुरूआत 1059-60 में यूनिवर्सिटीज के बीच होने वाली रोहिंटन बारिया ट्रॉफी से की थी। जिसमें उन्होंने 87 की औसत से कुल 435 रन बनाए थे।

गावस्कर ने सरदेसाई से सीखी थी तेज गेंदबाजी-

इतना हुनर होने के बाद भी सरदेसाई को वो दर्जा हासिल नहीं हुआ जिसके वे हकदार थे। उनके बारे में अक्सर ये कहा जाता था कि वे अच्छी गेंदबाजी नहीं करते। लेकिन सुनील गावस्कर ने इन सभी खबरों को गलत बताया और कहा कि तेज गेंदबाजी कैसे करते हैं ये मैंने राजदीप सरदेसाई से ही सीखा है।

मुंहफट थे सरदेसाई-

सरदेसाई को क्रिकेट की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करने पड़े थे। यही वजह थी कि वह गुस्से में सबके सामने कुछ भी बोल देते थे। लोगों का कहना था कि वे मजाक पसंद और खुशमिजाज व्यक्ति थे, लेकिन उनके मुंहफट स्वभाव और साफगोई की वजह से उनकी बहुत कम लोगों से बनी। कई बार इसी कारण वे खुद का भी नुकसान कर बैठते थे। एक बार मुख्य चयनकर्ता विजय मर्चेंट उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ चुनना नहीं चाहते थे, तब सरदेसाई ने उनसे कह दिया कि वह उन्हें नहीं चुनना चाहते तो साफ-साफ कह दें, बहाने न बनाएं। लेकिन इस वक्त उनकी किस्मत अच्छी रही कि वाडेकर के कहने पर उन्हें टीम में चुन लिया गया और जब वे कामयाब हुए तो खुद मर्चेंट उनके तारीफों के पुल बांधने से खुद को नहीं रोक पाए।

नहीं हारे कोई मैच-

राजदीप सरदेसाई का लक हमेशा उनके साथ रही। यही वजह थी कि वह जिस टीम के लिए खेले वह हारी नहीं। वे हर टीम के लिए भाग्यशाली साबित हुए।  भारत के दो लगातार विदेशी दौरे में पहली बार सीरीज की जीत में उनका महत्वपूर्ण रोल रहा। यह भी बात रही कि उन्होंने मुंबई में जितने भी मैच खेले एक में भी मुंबई नहीं हारी। उन्होंने मुंबई के लिए दस रणजी ट्रॉफी खेली और दसों में मुंबई ने शानदार जीत हासिल की।

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