page level


Friday, June 22nd, 2018 10:14 PM
Flash

यह दुनिया का पहला देश है जहाँ घरों की हो रही रिसाइक्लिंग




यह दुनिया का पहला देश है जहाँ घरों की हो रही रिसाइक्लिंगSocial



डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन को 2014 में यूरोप के ‘ग्रीन कैपिटल’ का दर्जा मिला था। यहाँ हर 10 में से 4 लोग साईकिल पर चलते है। 2025 तक शहर को पूरी तरह कार्बन-न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए जो तरीके अपनाए जा रहे है, उनमें से यह काफी अनूठा तरीका है। दरअसल, वह है बिल्डिंग का रिसाइक्लिंग। आपको बता दें, भारत की तरह डेनमार्क में भी लोग गाँवों से शहर में आकर बस रहे है।

वैसे देखा गया है कि, बिल्डिंग रिसाइक्लिंग में खाली हुए घरों की ईट से लेकर लकड़ी तक, सभी चीज़ो का इस्तेमाल नए घर बनाने में होता है। ध्यान रहे, एक ईट के दोबारा इस्तेमाल करने का मतलब है 0.5 किलो कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन रोकना। लेंड़ेजर ग्रुप की कंपनी रिसोर्स रोज ऐसी ही पुरानी चीज़ों से ही नई बिल्डिंग बना रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन (आईईए) के अनुसार 2025 तक डेनमार्क में 70% बिजली पानी, सौर और पवन जैसे रिन्युएब्ल स्त्रोतों से बनेगी।

इस प्रक्रिया से इस तरह हुआ है काम:-

1) बिल्डिंग रिसाइक्लिंग डेनमार्क में नए बिजनेस के तौर पर उभर रहा है। इससे गाँवों में भी घरो के अच्छे दाम मिलने लगे है। पहले इनके खरीदार भी नही होते थे।

2) आपको बता दें, डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार का काम रिसाइक्लिंग वाले मटेरियल से ही किया गया है। इसके साथ ही कॉलेज और वेयरहाउस भी बनाए जा रहे है।

3) कोपेनहेगन में वेकस्त नाम का एक रेस्तरां है जिसे रिसाइक्लिंग मटेरियल से ही बनाया गया है। बताया जाता है इस रेस्तरां को बनाने में एक पुराने म्यूजियम की चीजों का इस्तेमाल किया गया है।

यह भी पढ़े;-

यह है देश की 8 अमीर भारतीय बिजनेस वुमन

शहर ही क्यों, गांव में भी कर सकते हैं ये बिजनेस, बन जाएंगे लखपति

6 पार्ट-टाइम बिजनेस जो बिना इनवेस्टमेंट के देंगे फायदा

नासा बनाना चाहता है मानव मल से कृत्रिम भोजन

 

Sponsored