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Tuesday, December 12th, 2017 11:52 PM
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इस राज्य में है देश का बेनाम रेलवे स्टेशन, हर दिन गुजरती 6 ट्रेन




इस राज्य में है देश का बेनाम रेलवे स्टेशन, हर दिन गुजरती 6 ट्रेनTravel

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दुनिया में चौथे नंबर पर भारत देश का रेलवे नेटवर्क आता हैं। पहले पर यूएस, दूसरे पर चाईना और तीसरे पर रशिया आता है। भारत देश में रेलवे नेटवर्क इतना बड़ा है जिसकी पीछे कई सारी काहनियां है। कुछ प्लेटफॉर्म भूतकथा, सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म, सबसे छोटा प्लेटफॉर्म, किसी पहाड़ी पर प्रसिद्ध ट्रेन तो एक स्टेशन पर दो राज्यों के नाम से प्रसिद्ध है रेलवे स्टेशन। साथ ही हम किसी भी रेल्वे स्टेशन के बारे में बात करते है तो उस प्लेटफॉर्म का नाम जरूर बताते है। लेकिन पश्चिम बंगाल में एक ऐसा स्टेशन है जिसका नाम ही नहीं है। आइये जानते है क्या है उसके पीछे की कहानी।

पश्चिम बंगाल का रैना गांव जो बुर्डवान जिले में आता है। यह इस जिले से तकरीबन 300 किमी दूर है। आज वीकिपीडिया के मुताबिक भारत में 7112 रेलवे स्टेशन है जिसमें से यह एक ऐसा रेलवे स्टेशन है जो बेनाम है। यह कहानी 2008 की जब यह बना था। स्टेशन तो बन गया लेकिन इस स्टेशन का कोई नाम नहीं है।

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यह कहानी है बेनाम रेलवे स्टेशन की

2008 में बने इस रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर दोनों तरफ कुछ भी नहीं लिखा है। यह साइन बोर्ड दो गांवो के बीच की गवाही है। इसमें एक गांव का नाम है रैनागर और दूसरा रैना। आठ साल पहले यह स्टेशन रैनागर से ही जाना जाता था लेकिन आज ट्रेन वहां से 200 मीटर की दूरी पर रूकती है। यह तब एक संकीर्ण गेज मार्ग था। जिसे बंकूरा- दामोदार रेल मार्ग कहा जाता है।

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कुछ समय बाद जब वहां पर ब्रॉड गेज लाइन के हिस्से के रूप में नया स्टेशन बना वह रैना गांव के नीचे आया और मासाग्राम के निकट हावड़ा-बर्धमान तार से जुड़ा था। बस इसके बाद से यह मुद्दा उठा था कि इस स्टेशन का नाम क्या होगा। इसके बाद से रैना गांव के रहवासियों ने रैनानगर का नाम रखने से मना कर दिया क्योंकि यह अब उस क्षेत्र में नहीं आता है और उन्होंने जोर दिया कि इसका नाम रैना होना चाहिए।

पैसेंजर्स के लिए बना मुसिबत

दरअसल, एक दिन में 6 बार यहां से ट्रेन गुजरती है। लेकिन, ट्रेन में सवार यात्रियों के लिए बड़ी असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है कि यह कौन सा स्टेशन आ गया। इससे कई बार उन्हें समझ नहीं आता की वह कहां पर पहुंच गए है। इसके बाद लोकल रहवासियों से पूछने के बाद पता चलता है कि वह किस जगह पर है। लेकिन यहां पर टिकट अभी भी रैनानगर के नाम से ही बिकती है।

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रैना गांव के लोगों ने पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु से आग्रह किया था कि वह इसका कोई हल निकाले ताकि पैसेंजर्स को कोई दिक्कत नहीं हो। क्योंकि यहां पर जब भी ट्रेन आकर रूकती है तब पैसेंजर समझ नहीं पाते है कि वह कहां आ गये है।

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