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Sunday, December 17th, 2017 04:16 AM
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OMG, ये तो डायमंड से भी महंगा है…आख़िर क्या है इसकी खासियत




OMG, ये तो डायमंड से भी महंगा है…आख़िर क्या है इसकी खासियतAuto & Technology

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अधिकतर लोगो को देखा गया हैं कि, सभी सोना, चाँदी, डायमंड और प्लैटिनम की कीमत पर ख़ासा ध्यान रखते हैं। वैसे यह तो सभी जानते हैं कि, डायमंड और प्लैटिनम की कीमत में हमेशा उछाल बना रहता हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मेटल के बारे में बताएँगे जिसकी कीमत डायमंड और प्लैटिनम यह दोनों से भी ज्यादा देखी गई हैं। बताया जा रहा हैं कि, पिछले एक साल के मुकाबले यह दुर्लभ मेटल की कीमत में करीब 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई हैं।

दरसल, दुनिया के सबसे बड़े मेटल मार्केट “लंदन मेटल एक्सचेंज” के अनुसार पिछले शुक्रवार को एक औंस पैलेडियम 1008 अमरीकी डॉलर में मिल रहा था और एक साल पहले इसकी कीमत करीब 681 अमरीकी डॉलर थी। आपको बता दें, 2001 के बाद ऐसा पहली बार हुआ हैं।

मेटल

बताया जा रहा हैं कि, पैलेडियम मेटल की कीमत का बढ़ना डीजल कारों का चल रहा विवाद हैं। जी हाँ! इंजन से छेड़छाड़ के आरोपों में डीज़ल गाड़ियों की इमेज को काफ़ी नुक़सान हुआ था जिससे लोगों का भरोसा डीजल गाड़ियों से उठने लगा था। यहीं कारण था कि, पहली बार पेट्रोल गाड़ियों की बिक्री डीज़ल गाड़ियों के मुकाबले बढ़ी थी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें, ‘पैलेडियम’ पेट्रोल गाड़ियों के एक्ज़ॉस्ट के लिए इस्तेमाल होता हैं जो कैटेलिस्ट कनवर्टर बनाने के लिए होता हैं।

ACEA के डेटा के अनुसार साल 2017 के पहले 6 महीनों में सिर्फ़ डीज़ल गाड़ियों की बिक्री घटी हैं। इसके साथ ही यूरोप में हाइब्रिड, बिजली या नेचुरल गैस से चलने वाली गाड़ियों की बिक्री बढ़ी हैं। आपको बता दें, चीन और भारत में पहले से ही पेट्रोल गाड़ियों की डिमांड ज़्यादा रहीं हैं। कुछ इन्हीं कारणों के चलते पैलेडियम की डिमांड बढ़ी हैं। ख़बर यह भी हैं कि, इस साल जनवरी से जून के बीच डीज़ल गाड़ियों की बिक्री चार प्रतिशत घटी हैं तो वहीं पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की बिक्री 10 प्रतिशत बढ़ी हैं।

मेटल

ICBC स्टैंडर्ड बैंक के डेटा के अनुसार इस साल खदानों से निकाले जाने वाले 75 से 80 फ़ीसदी पैलेडियम का इस्तेमाल कैटेलिस्ट कनवर्टर बनाने के लिए होगा। आपको बता दें, यह कनवर्टर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को वॉटर वेपर में बदल देता हैं।

मार्कस गार्वी ने बीबीसी को इंटरव्यू देते हुए कहा हैं कि, “मुझे भरोसा हैं कि ये कीमतें और बढ़ेंगी। पैलेडियम 1000 डॉलर प्रति औंस से महंगा ही रहेगा, जो कि प्लैटिनम से महंगा हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया प्लैटिनम की कीमतें स्थिर हैं लेकिन पैलेडियम निकालने में काफ़ी खर्च होता हैं और इस खर्चे की पूर्ति नहीं हो पा रही हैं इसलिए रूस में इसके प्रोडक्शन के बढ़ने की उम्मीद कम हैं। हाँ! यह भी सही हैं कि, अगले दो तीन साल तक कोई भी पैलेडियम का नया खदान नहीं आएगा, लेकिन डिमांड बनी रहेगी।”

गार्वी अपने इंटरव्यू में बाताते हैं कि, स्विट्जरलैंड में जितना पैलेडियम जा रहा हैं उससे ज़्यादा वहाँ से आ रहा हैं क्योंकि आयात और निर्यात की बात करें तो पिछले साल वहाँ के आयात का नेट बैलेंस 4.7 टन था लेकिन इस साल वहाँ के निर्यात का नेट बैलेंस 4.2 टन हैं। इससे यह कहा जा सकता हैं कि, डिमांड अभी बनीं रहेगी।

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