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Tuesday, August 14th, 2018 03:45 PM
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जम्मू कश्मीर के Article 35ए पर आज होगी सुनवाई, जानिए क्या है धारा 35ए




जम्मू कश्मीर के Article 35ए पर आज होगी सुनवाई, जानिए क्या है धारा 35ए



आज सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर को लेकर बड़ी सुनवाई होने वाली है। यहां जम्मू कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 35 ए के खिलाफ दायर पीआईएल पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। बता दें कि इस आर्टिकल के तहत जम्मू कश्मीर के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अनुच्छेद 35 ए की संवैधानिक वैधता को चार याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई है।

एक एनजीओ विद द सिटीजन ने 2014 में मुख्य याचिका दायर की थी। अब दायर याचिका पर अलगाववादी नेताओं ने कहा है कि अगर कोर्ट जम्मू कश्मीर के लोगों के खिलाफ कोई फैसला देगा, तो जन आंदोलन होगा। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूर्ण की बेंच सुनवाई करेगी।

जानिए क्या है जम्मू कश्मीर की धारा 35ए-

आर्टिकल 35 ए संविधान की मुख्य धारा में शामिल है। जिसके अनुसार राज्य में रहने वाले नागरिकों को कई विशेषाधिकार दिए गए हैं। इस आर्टिकल के अनुसार राज्य से बाहर रहने वाले लोग वहां जमीन नहीं खरीद सकते । और न ही वहां हमेशा के लिए बस सकते हैं। इतना ही नहीं बाहर के लोग राज्य सरकार द्वारा लागू की गई स्कीमों का भी लाभ नहीं उठा सकते। यहां तक की कोई सरकारी नौकरी भी नहीं कर सकते।

देश के पहले प्रधानमंत्री ने पारित किया था आदेश-

14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था। इस आदश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35ए जोड़ दिया गया है। बहुत कम लोगों को पता है कि अनुच्छेद 35 ए धारा 370 का ही हिस्सा है। । इस धारा की वजह से कोई भी जम्मू में अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकता और न ही वहां का सथायी नागरिक बनकर रह सकता है।

खत्म हो जाएंगे लड़कियों के अधिकार

धारा 35ए के तहत अगर जम्मू कश्मीर की कोई भी लड़की बाहर के राज्य के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

क्‍यों उठी हटाने की मांग

इस अनुच्छेद को हटाने के लिए एक दलील ये दी जा रही है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया था. दूसरी दलील ये है कि देश के विभाजन के वक्त बड़ी तादाद में पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आए। इनमें लाखों की तादाद में शरणार्थी जम्मू-कश्मीर राज्य में भी रह रहे हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने अनुच्छेद 35A के जरिए इन सभी भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया। इन वंचितों में 80 फीसद लोग पिछड़े और दलित हिंदू समुदाय से हैं। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में विवाह कर बसने वाली महिलाओं और अन्य भारतीय नागरिकों के साथ भी जम्मू-कश्मीर सरकार अनुच्छेद 35A की आड़ लेकर भेदभाव करती है।

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