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Thursday, December 14th, 2017 10:00 AM
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नीलामी में घर खरीदना हुआ आसान लेकिन रखें इन बातों का ध्यान




नीलामी में घर खरीदना हुआ आसान लेकिन रखें इन बातों का ध्यानBusiness

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हर व्यक्ति का एक सपना होता हैं कि, उसका एक घर का मकान हो जिसके लिए वह हर संभव कोशिश करता हैं। कभी-कभी लाख कोशिश करने के बावजूद वह घर नहीं खरीद पाता हैं। वैसे यह कोई बड़ी परेशानी नहीं हैं क्योंकि आपको जानकर ख़ुशी होगी कि, अब आप अपना खुद का घर खरीद सकते हैं लेकिन उसके लिए आपको थोडा स्मार्ट तरीका अपनाना पड़ेगा। आपको बता दें, बैंकों द्वारा हजारों फ्लैट्स या घरों की हर साल नीलामी होती हैं जिसमे आप हिस्‍सा लेकर अपने लिए एक घर सुनिश्चित कर सकते हैं।

यदि कोई कस्‍टमर लगातार 3 महीनों तक बैंक की EMI नहीं भरता हैं तो बैंक उसे एनपीए मान लेता हैं। इसके बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बैंक उसकी नीलामी करने की तरफ बढ़ता हैं लेकिन इससे पहले उसे कुछ और चीजें करनी पड़ती हैं  जैसे- नीलामी से 30 दिन पहले उस जगह के प्रमुख अखबारों में इश्‍तेहार देना।

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इश्‍तेहारों को समय पर पढ़ना और उसे समझना नीलामी प्रक्रिया में हिस्‍सा लेने के लिए बहुत जरूरी होता हैं। वैसे नीलामी से एक सप्‍ताह पहले बोली लगाने के इच्‍छुक लोगों को एक डीडी जमा करना होता हैं, जो सामान्‍य तौर पर कुल अनुमानित कीमत का 15-20 फीसदी होता हैं। जमा की गई इस रकम को अर्नेस्‍ट मनी कहा जाता हैं।

आपको बता दें, यह रकम आपसे इसलिए ली जाती हैं, ताकि गंभीर लोग ही बिडिंग प्रोसेस का हिस्सा बने। यदि बोली जीतने के बाद कोई प्रॉपर्टी लेने से मुकर जाता हैं तो यह रकम जब्‍त भी की जा सकती हैं। अधिक बोली लगाने वाले को ही यह प्रॉपर्टी मिलती हैं और बोली जीतने के बाद ही 25 फीसदी रकम आपको तुरंत देना पड़ती हैं। इसके बाद 75 फीसदी रकम के लिए आपको 15 दिन या उससे थोड़ा अधिक समय दिया जाता हैं।

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नीलामी मामलो के एक्सपर्ट और वकील अमित मिश्रा के अनुसार नोटिस में आप नीलामी की जगह, तारीख, रकम समेत सभी जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं। वैसे बैंकों द्वारा की जाने वाली नीलामी की जानकारी के लिए आपको इनकी वेबसाइटें भी देखनी चाहिए। नीलामी प्रक्रिया में ब्‍लैकमनी बिल्‍कुल नहीं चलती हैं। इसमें सब कुछ व्‍हाइट में ही होता हैं।

जानिए कितने प्रकार की होती हैं नीलामी

1) फिजिकल

2) ई-ऑक्‍सनिंग

यदि किसी जगह पर नीलामी के साथ ही ई-नीलामी भी हो रहीं हैं तो उसे फिजिकल नीलामी कहते हैं। वैसे यह नीलामी बैंकों को महंगी पड़ती हैं, क्‍योंकि इसमें कई अधिकारियों के साथ-साथ अन्‍य कर्मियों को भी शामिल होना पड़ता हैं। इसमें समय और संसाधन दोनों अधिक लगते हैं। वहीं यदि आप ई-ऑक्‍सनिंग नीलामी करते हैं तो यह आसान होती हैं। वैसे इसमें 10 लाख तक की प्रॉपर्टी की नीलामी डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट में भी हो सकती हैं।

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