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प्रेम की जीत




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केरल के कथित लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हदिया और शफीन के निकाह को फिर से बहाल कर दिया है। कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है,जिसमें हदिया की शादी को अवैध करार दिया गया था। तमिलनाडु में पढ़ाई करते हुए 2016 में हादिया ने इस्लाम अपनाया था, उसके मुताबिक अपने साथ पढ़ने वाली दो मुस्लिम लड़कियों को देखकर उन्होंने ये फैसला लिया था। तब उसके पिता ने केरल की अदालत में मुकदमा दर्ज किया कि उनकी बेटी को जबरन मुस्लिम बनाया गया है। लेकिन हादिया का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने उन्हें अपनी मर्जी से रहने की इजाजत दी। इसके बाद अगस्त 2016 में हादिया के पिता फिर अदालत पहुंचे और दावा किया कि उनकी बेटी देश छोड़कर जा रही है। इस दौरान हादिया की शादी हो चुकी थी और इस बार अदालत ने हादिया का विवाह खारिज करते हुए उनकी कस्टडी उनके माता-पिता को सौंप दी थी।

एक 24 वर्षीय युवती अगर अपना जीवन अपने तरीके से जीना चाहती है, तो भारत का संविधान उसे इसकी इजाजत देता है। लेकिन हादिया के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उसके विवाह को लव जिहाद जैसा नाम दे दिया गया और धर्म के ठेकेदारों ने इस पर काफी राजनीति की। हादिया के पति शफीन के संबंध आईएस से होने के आरोप भी लगाए गए। हादिया के पिता के वकील का भी यह मानना है कि यह लव जिहाद का मामला नहीं, बल्कि जबरन धर्म परिवर्तन का मामला है। इस मामले की जांच एनआईए को अगस्त में सौंपी गई। एनआईए ने राज्य में लव जिहाद के 89 मामलों की जांच की है। जांच में यह पता चला कि नौ मामलों में इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आतंकी संगठनों से किसी न किसी जुड़ाव के संकेत मिले हैं। एनआईए की जांच में जिन नौ मामलों को कथित लव जिहाद का मसला माना जा रहा, उनका आधार हिंदू लड़कियों के मां-बाप की शिकायत को माना गया और पाया गया कि इन मामलों में संबंध आईएस से था। हालांकि अन्य 80 मामलों में किसी भी तरह के सबूत नहीं मिले तो उनकी जांच रोक दी गयी। एनआईए ने अदालत को बताया है कि उसका मानना है कि कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें हिंदू महिलाओं को इस्लाम कबूल करने के लिए फुसलाया गया है। लेकिन अब तक इनका कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया है। जहां तक शफीन पर लगे आरोपों का सवाल है, वे अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं।

गौरतलब है कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में हिंदू और मुस्लिमों के बीच शादी की निंदा की जाती है। कट्टर हिंदू समूह ऐसी शादियों को लव जिहाद कहते है। खाप पंचायतों द्वारा तो ऑनर किलिंग के नाम पर कई बार ऐसे युगलों की हत्या तक कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी खाप पंचायत को भी कड़ी फटकार लगाई और उन्हें ऑनर किलिंग के नाम पर कानून को हाथ में न लेने की नसीहत दी थी। उसके पश्चात राज्य सरकारों को अंतरजातीय विवाह करने वालों को सरंक्षण देने का निर्देश दिया था। महिला दिवस के अवसर पर बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने हदिया को तोहफा देते हुए अपने फैसले में कहा है कि हदिया और शफीन पति पत्नि की तरह रह सकते हैं। किसी भी विवाह को कैसे रद्द किया जा सकता है, जब दोनों महिला और पुरुष वयस्क हैं।

लेखक- कुशाग्र वालुस्कर

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