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Saturday, July 21st, 2018 09:19 PM
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100 करोड़ की दौलत छोड़ आज सन्यासी बनने जा रहा है ये लड़का..




100 करोड़ की दौलत छोड़ आज सन्यासी बनने जा रहा है ये लड़का..Social



आज हर कोई भगवान से करोड़पति बनने की प्रार्थना करता है। हर कोई चाहता है उसके पास अच्छी गाड़ी, अच्छा खासा बैंक बैलेंस हो। अगर ये करोड़ों की दौलत हो तो कोई इसे क्यों छोड़ेगा भला। लेकिन गुजरात के अहमदाबाद में आज एक ऐसा ही ऐतिहासिक होने जा रहा है, जिसे सुनकर आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे। अहमदाबाद का एक लड़का करोड़ों की दौलत होते हुए भी सन्यासी बनने जा रहा है।

आज मंगलवार को अहमदाबाद में एल्युमिनियम व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखने वाले 24 साल के मोक्षेश शाह जैन भिक्षु के रूप में दीक्षा लेने जा रहे हैं। सुनकर हर कोई कहेगा – अच्छा पागल है। करोड़ों की दौलत कोई त्यागता है क्या। फिलहाल मोक्षेश अपने पिता की 100 करोड़ की दौलत संभाल रहा है, लेकिन अचानक उसने सन्यासी बनने का फैसला आखिर क्यों लिया। इस फैसले पर मोक्ष का मानना है कि पैसों से सबकुछ नहीं खरीदा जा सकता और मोक्ष सबसे ज्यादा जरूरी है।

हैं परिवार के पहले सदस्य-

मोक्षेश अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, तो भिक्षु के रूप में दीक्षा लेने जा रहे हैं। वे रत्नमुनिराज जिन प्रेमविजय जी महाराज से अहमदाबाद के पास अमियापुर में दीक्षा लेंगे। मोक्षेश का मानना है कि अगर पैसों से सबकुछ खरीदा जा सकता तो लोग इतने दुखी नहीं होते। कुछ हासिल करने से आंतरिक खुशी नहीं मिलती बल्कि कुछ छूट जाता है।

सीए हैं मोक्षेश-

आपको जानकर हैरत होगी कि मोक्षेश चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। सीए बनने के बाद दो साल उन्होंने अपना बिजनेस किया। वे बताते हैं कि ये काम करते हुए मैंने पाया कि मुझे अपनी बैलेंस शीट में पुण्य का बैलेंस बढ़ाना है, इसलिए ये फैसला लिया। मैं पिछले साल ही दीक्षा लेना चाहता था, लेकिन मां जिगनाबेन और पिता संदीप भाई इसके लिए तैयार नहीं थे। हालांकि उन्होंने इस साल मुझे दीक्षा लेने की अनुमति दी है।

मोक्ष का रास्ता सबसे अच्छा-

मोक्षेश कहते हैं कि मोक्ष का रास्ता सबसे अच्छा है। लेकिन जीवन में आपको दूसरों के लिए मददगार बनना चाहिए। यहां तक की परमात्मा भी कहते हैं कि दूसरों के लिए मददगार बनो। मोक्षेश के इस फैसले के बाद सभी अहमदावासी दंग हैं और इनसे मिलने वालों की भीड़ उनके घर जमा हैं। हर कोई हैरत में है कि इतनी कम उम्र में करोड़ों की दौलत छोड़ कोई कैसे ऐसा कठोर फैसला ले सकता है।

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