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Friday, May 25th, 2018 12:51 AM
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किराएदार के नए कानून होगें जल्द लागू, ये 7 बड़ें फायदे मिलेंगे




किराएदार के नए कानून होगें जल्द लागू, ये 7 बड़ें फायदे मिलेंगेBusiness



केंद्र सरकार ने रेंटल हाउसिंग को बढ़ाने के लिए 3 साल पहले एक मॉडल टेनेंसी एक्ट तैयार किया था और राज्यों से कहां कि वे रेंट कंट्रोल एक्ट 1948 की बजाए नया कानून अपनाएं। जल्द ही यह कई बड़ें राज्यों में लागू होने वाला है। राज्य ने भी क्रेंद सरकार को यह आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही यह नया एक्ट अपने राज्य में लागू करेंगे। यह एक्ट कुछ राज्यों में लागू होने जा रहा है जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल आदि शामिल हैं। ये राज्य केंद्र के अनुसार जल्द ही अपने राज्य में किराय के इस कानून को लागू करने वाले हैं। अगर आप किराएदार है तो यह आपके हित में एक नई पहल है –

1. नहीं देना होगा सिक्योरिटी डिपोजिट

केंद्र सरकार के टेनेंसी एक्ट के ड्राफ्ट के अनुसार किराए का 3 गुना सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना अब तक गैर – कानूनी होगा जब तक इसका अग्रीमेंट न बनवाया गया हो। किरायेदार के घर खाली करने पर मकानमालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।

2. बिना बताएं मकानमालिक नहीं आ सकता है

घर के मुआयने, रिपेयर से जुड़ें या किसी और मकसद से आने से पहले मकानमालिक को 24 घंटों का लिखित नोटिस एडवांस में देना होगा।

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3. कब बढ़ेगा किराए

नए ड्राफ्ट के अनुसार बिल्डिंग के ढांचे की देखभाल के लिए किराएदेर और मकानमालिक दोनों ही जिम्मेदार होंगे। वहीं दूसरी ओर मकानमालिक मकान में कोई रिनोवेशन करता है तो इसके बाद में उन्हें किराया बढ़ाने का अधिकार है। वहीं दूसरी और रेंट अग्रीमेंट के बाद में कुछ रिनोवशन कराना हो या कुछ ठीक करवाना हो ऐसे में मकानमालिक उस समय ठीक कराने की स्थिति में नहीं हो तो किराएदार रेंट कम करने के लिए कह सकता है। अगर झगड़ें की स्थिति में वह रेंट अथॉरिटी से भी संपर्क कर सकता है।

4. 1 महीने का प्राइयोर नोटिस

किराएदार के लिए यह जरूरी है कि वह घर छोड़ने से पहले मकान मालिक को एक महीने का नोटिस दे।

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5. मकान खाली नहीं करा सकता मालिक

रेंट अग्रीमेंट में लिखी अवधि से पहले किराएदार को निकाला नहीं जा सकता है। लेकिन अगर वह रेंट अग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी उसी मकान में रहता है तो मकानमालिक को दुगना मासिक मांगने का पूरा अधिकार है।

6. किराएदार की अचानक मौत

रेंट अग्रीमेंट के दौरान अगर किराएदार के खास सदस्य की मौता हो जाती है ऐसा अग्रीमेंट में ही लिखा होता है। लेकिन अगर उनका परिवार होता है तो यह फैसला उनके परिवार वालों का होता हैं कि उन्हें क्या करना है।

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7. सिविल कोर्ट में नहीं जा सकेंगे

ड्राफ्ट में केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से कहा गया है कि वह किराया विवाद निपटाने वाली अदालतों, प्राधिकरण या अधिकरण का गठन करें। यह संस्थाएं सिर्फ मकानमालिक और किरायेदारों के विवादों का निपटारा करेंगी। इसका मतलब है कि आप किराये से संबंधित विवाद निपटाने के लिए सिविल अदालतों का रुख नहीं कर सकते।

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