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15/01/2018

नौसेना को मिला शक्तिशाली योद्धा, 17 साल करना पड़ा था इंतज़ार




नौसेना को मिला शक्तिशाली योद्धा, 17 साल करना पड़ा था इंतज़ारAuto & Technology

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किसी भी देश के लिए उसकी सुरक्षा एक अहम मुद्दा होती है। देश की सुरक्षा के लिए हर देश में जल, थल और वायु सेना होती है और कई तकनीक से लैस हथियार होते हैं। भारत के पास भी कई सारे हथियार हैं जो नई-नई तकनीकों से लैस हैं। हाल ही में पीएम मोदी ने नौसेना को एक नया योद्धा दिया है जो काफी ताक़तवर है। इस योद्धा का नाम है आईएनएस कलवरी।

17 साल बाद देश को मिला नया सबमरीन

आईएनएस के रूप में 17 साल बाद देश को नया सबमरीन मिला है। इससे समंदर में भारत की ताक़त बढ़ गई है। यह सबमरीन दुश्मन के नापाक मंसूबों को नाक़ाम करने की ताक़त रखता है। आपको बता दें कि यह काफी ताक़तवर है और हिंद महासागर में दुश्मनों के लिए ये अकेला काफी शक्तिशाली रहेगा।

1967 में मिला था पहला सबमरीन

आईएनएस कलवरी करीब दो दशकों बाद भारत को मिला पहला नया डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन है। इससे नौसेना की ताक़त बढ़ी है क्योंकि इस समय सेना के पास केवल 13 पारंपरिक सबमरीन है। गहरे समंदर में पाई जाने वाली खतरनाक शार्क के नाम पर सबमरीन का नाम आईएनएस कलवरी रखा गया है। साल 1967 में भारत को पहला सबमरीन मिला था।

फ्रांस ने भी की है मदद

आईएनएस कलवरी को फ्रांस के सहयोग सें बनाया गया है। इसकी लागत 23,652 करोड़ रूपए के अंतर्गत बनाया गया है। इसका वज़न 1565 टन है। इस प्रोजेक्ट को बनाते समय काफी देर हो गई थी जिसके कारण खर्च भी काफी बढ़ गया था। इसके बाद 2005 में भारत का फ्रेंच शिपबिल्डर डीसीएनएस के साथ करार हुआ जिसके बाद ये सबमरीन तैयार हुआ।

थोड़े की और जरूरत है

भारत की नौसेना में भले ही ये शक्तिशाली सबमरीन शामिल हुआ हो लेकिन भारत को पाकिस्तान और चीन को दोनों मोर्चों पर शिकस्त देने के लिए कम से कम 18 डीजल इलेक्ट्रिक और 6 परमाणु न्यूक्लियर अटैक सबमरीन्स की जरूरत है। इस समय भारत में 13 डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन हैं, जो 17 से 32 साल पुराने हैं हालांकि इसमें से केवल 7 या 8 ही एक समय पर ऑपरेशनल रहते हैं।

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