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Wednesday, September 19th, 2018 02:41 PM
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रोजगार को लेकर राहुल के दावों में है कितनी सच्चाई, जानिए इन आंकड़ों से




रोजगार को लेकर राहुल के दावों में है कितनी सच्चाई, जानिए इन आंकड़ों सेPolitics



कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों यूरोप की यात्रा पर हैं। वे वहां लगातार अपने बयानों से पीएम मोदी पर वार कर रहे हैं। बेरोजगारी को लेकर उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधा है और कहा है कि चीन जहां एक दिन में 50 हजार नौकरियों का सृजन करता हंै, वहीं भारत 450 नौकरियां ही बड़ी मुश्किल से दे पाता है। अब राहुल के बयानों में कितनी सच्चाई है ये तो हम नहीं जानते, लेकिन हम आपके सामने आज कुछ आंकड़े पेश कर रहे हैं, जिससे आप खुद इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि पिछले 4 सालों में मोदी सरकार ने रोजगार के लिए क्या किया।

# प्रधानमंत्री बनने से पहले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी ने देश में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। श्रम मंत्रालय के आंकड़ों मुताबिक साल 2015 में महज 1.35 लाख नौकरियां पैदा की गई जो पिछले सात सालों का सबसे निचला स्तर है।

# साल 2014 में यह आंकड़ा 4.93 लाख था। जबकि साल 2016 में इसमें कुछ गिरावट आई और यह आंकड़ा 2.31 लाख नौकरियां का रहा गया।

# मोदी सरकार के तीनों साल के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो अब तक सिर्फ और सिर्फ 9 लाख 97 हजार नौकरियां दी हैं।

# केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2017 से जून 2018 के बीच 1.2 करोड़ रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ। इसमें सबसे अधिक इस साल मई में 13 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले हैं।

रोजगार पर क्या कहना है पीएम मोदी का

इधर, पीएम मोदी का कहना है कि देश में लगातार रोजगार का सृजन हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा था कि ईपीएफ के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच 41 लाख नौकरियां पैदा हुईं। यानी 8 महीनों में संगठित क्षेत्र में 41 लाख नौकरियां पैदा हुई। जबकि संगठित और असंगठित क्षेत्रों को मिलाकर पिछले साल 70 लाख नौकरियां पैदा हुईं।

4 करोड़ रजिस्ट्रेशन और सिर्फ 8 लाख नौकरियां

पीएम मोदी सरकार ने नौकरी दिलवाने के नाम पर नेशनल करियर सर्विस पोर्टल लॉन्च किया था। ढाई सालों में पोर्टल पर करीब 4 करोड़ बेरोजगारों ने नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन किया। NCS पोर्टल में सरकार ने सौ करोड़ रुपये का निवेश भी किया। जुलाई 2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक सिर्फ 8 लाख नौकरियां ही निकाली गई हैं।

अगर कांग्रेस सरकार के पन्ने पलटें तो  यूपीए-2 के शुरू दो साल में 2009 और 2010 में 10.06 और 8.65 लाख नए रोजगार सृजित हुए थे। यदि इसकी तुलना 2015 और 2016 से की जाए तो मोदी राज के इन दो सालों में तकरीबन 74 फीसदी रोजगार के अवसर कम हो हुए। हालांकि मोदी सरकार रोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है, लेकिन बताए गए आंकड़ों को देखकर आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि रोजगार को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ राहुल के दावे कितने गलत हैं और कितने सही।

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