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Thursday, May 24th, 2018 12:17 AM
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मकर संक्रांति के बारे में ये 5 बातें नहीं जानते तो आप कुछ नहीं जानते




मकर संक्रांति के बारे में ये 5 बातें नहीं जानते तो आप कुछ नहीं जानतेSpiritual



मकर संक्रांति में अब कुछ ही दिन रह गए है लेकिन क्या आप मकर संक्रांति का अर्थ जानते है? खैर परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आज हम आपको इस दिन की उपयोगिता के बारें में बताएँगे। मकर संक्रांति में ‘मकर’ शब्द का अर्थ है कि, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना है। वहीं ‘संक्रांति’ का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। जी हाँ! मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। आपको बता दें, एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं।

यह दिन कई मायनों से बहुत महत्वपूर्ण है। शास्त्रों के अनुसार भी इस दिन की महत्वकांक्षा काफी अधिक होती है। इसके साथ ही यह दिन एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है। वहीं उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बांटा जाता है। आइए जानते है यह दिन क्यों ख़ास है:-

1) फसलों का लहलहाना

आपको बता दें, इस दिन वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है। जिससे यह पर्व संपूर्ण अखंड भारत में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। खरीफ की फसलें कट चुकी होती हैं और खेतों में रबी की फसलें लहलहा रही होती हैं। इसके साथ ही खेतों में सरसों के फूल मनमोहक लगते हैं।

2) दान-पुण्य और पूजा

कहते है कि, इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।

3) अच्छे दिन की शुरुआत

भगवान श्रीकृष्ण गीता में उत्तरायन का महत्व बताते हुए कहते है कि उत्तरायन के 6 मास के शुभ काल में जब सूर्यदेव उत्तरायन होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता। जी हाँ! ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। यही कारण था कि भीष्म पितामह ने शरीर तब तक नहीं त्यागा था जब तक कि सूर्य उत्तरायन नहीं हो गया।

4) पतंग महोत्सव

यह पर्व को ‘पतंग महोत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। वैसे पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कि, कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना जो शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।

5) ऐतिहासिक तथ्य

आपको बता दें इस दिन से काफी ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हुए है। जी हाँ! हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है जो आषाढ़ मास तक रहता है। इसके साथ ही महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था।

वहीं मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर में मेला भी लगता है।

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