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Monday, September 24th, 2018 05:36 AM
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HIV- AIDS के मरीजों से किया दुव्यर्वहार, तो हो सकती है ये सजा….




HIV- AIDS के मरीजों से किया दुव्यर्वहार, तो हो सकती है ये सजा….Health & Food



हमारे देश में एचआईवी-एड्स के मरीजों को काफी गंदी निगाहों से दिया जाता है। कई समाजों में लोग एचआईवी पीडि़त को समाज का हिस्सा नहीं बनने देते, तो कुछ उन्हें अछूत कहकर संबोधित करते हैं। ऐसे में इन लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। लेकिन अब एचआईवी-एड्स से पीडि़त मरीजों के साथ गलत या दुव्यवहार करने पर आपको कड़ी सजा मिल सकती है।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को एचआईवी-एड्स अधिनियम 2017 की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत एचआईवी पीडि़त मरीज के साथ भेदभाव करने पर जेल की सजा काटनी पड़ेगी साथ ही जुर्माना भी भरना होगा। इस अधिनियम के तहत तीन महीने से लेकर दो साल तक की सजा का प्रावधान है।

यानि की इन मरीजों के साथ नौकरी, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, किराये पर मकान देने, निजी और सरकारी कार्यालय, स्वास्थ्य के क्षेत्र के इंश्योरेंस में यदि किसी तरह का भेदभाव किया गया तो उनके खिलाफ सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

बता दें कि 2014 में मंजूर हुआ ये बिल पिछले साल ही संसद में पारित हो चुका था, लेकिन इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। जिसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को फटकार भी लगाई थी। इस कानून के मुताबिक इस बीमारी से पीउि़त मरीजों का इलाज मुफ्त में करना अनिवार्य किया गया है।

मिलेगा ये अधिकार भी-

इन्हें अपमानित करने पर सामने वाले को सजा तो होगी ही साथ ही इन लोगों को कई अधिकार भी दे दिए गए हैं।
# एचआईवी-एड्स से ग्रसित मरीज को संपत्ति का अधिकार है। इसलिए माता-पिता या कोई और भी उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल नहीं कर सकता। ऐसा होने पर पीडि़त कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों को अपने घर में परिवार के साथ रहने का पूरा अधिकार है।
#  नौकरी पाने के लिए या शैक्षधिक संस्थानों में दाखिला पाने से पहले मरीज को अपनी बीमारी के बारे में बताना अनिवार्य नहीं है। उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
# यदि मरीज जानकारी देता भी है तो उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। नाम सार्वजनिक करने पर सजा के साथ जुर्माने का प्रावधान है। बता दें कि भारत में एचआईवी पीडि़त मरीजों की संख्या घटी है, बावजूद इसके अब भी यहां 21 लाख लोग एचआईवी-एड्स से पीडि़त हैं।

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