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Friday, September 21st, 2018 10:20 AM
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दिल से खुश नहीं है आपकी “मां”, मुस्कुराहट के पीछे छिपी हैं ये चिंता…..




दिल से खुश नहीं है आपकी “मां”, मुस्कुराहट के पीछे छिपी हैं ये चिंता…..



मां, वो है जो हमारे लिए क्या-क्या नहीं करती। हमारी खुशी के लिए अपनी खुशी दांव पर लगा देती है, ताकि हमें दुख न हो। खुद भीतर से चाहे जितनी भी परेशान क्यों न हो, लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रखकर हमारी हिम्मत बढ़ाती है। हमें लगता है कि हमारी मां खुश है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है। कम से कम मॉम्सप्रेस वेबसाइट द्वारा कराए गए सर्वे से मिले आंकड़ों से तो ऐसा नहीं लगता।

हाल ही में मदर्स डे के मौके पर मॉम्सप्रेस ने देश की 1200 मांओं जिसमें वर्किंग और हाउसवाइफ दोनों मांएं शामिल है, पर सर्वे कराया। इस मॉम्स हैप्पीनेस सर्वे में दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू , कोलकाता की महिलाएं शामिल हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में करीब 70 प्रतिशत मां खुश नहीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है उन्हें कम प्रशंसा मिलना।

जी हां, घर हो या ऑफिस लेकिन बेहतर काम के बावजूद प्रशंसा और एप्रिसिएशन न मिलने के कारण कई महिलाएं खुश नहीं रहती। इससे उनकी हौंसलों में कमी आ रही है। सर्वे में शामिल ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि उन्हें अपने काम और संघर्ष के लिए छोटी सी तारीफ भी नहीं मिल पाती है।

वहीं कामकाजी महिलाएं वर्क प्लेस पर अपने बेहतर काम के एवज में सहकर्मियों और बॉस से थोड़ी सी प्रशंसा की उम्मीद रखती हैं। मॉम्सप्रेस के सीईओ विशाल गुप्ता का कहना है कि घर हो या ऑफिस अपने काम के लिए महिलाओं को सम्मान मिलना ही चाहिए।

ये वजह करती हैं मां को दुखी-

वैसे तो हर मां की नाखुशी की वजह अलग हो सकती है, लेकिन सर्वे के अनुसार 73 फीसदी माएं ऐसा सोचती हैं कि वे अच्छी मां नहीं हैं। किसी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता करना उनके दुखी रहने का कारण बन जाता है। खुद की खुशी के लिए कभी प्रयास न करने वाली ये मां इस बात से भी दुखी रहती है कि वो खुद के लिए कुछ क्यों नहीं कर पाती, जिससे उन्हें खुशी मिले। परिवार की इच्छाएं पूरी करने के लिए अपनी इच्छाओं को भूल जाती है।

आंकड़ों से पता चलता है मां घर में बनने वाले खाने , बच्चों की परीक्षाएं, अनुशासन आदि चीजों को लेकर ज्यादा चिंता में रहती हंै। इस कारण वे चाहते हुए भी खुश नहीं रह पाती।

जानिए शहरों में क्या है एक मां की सोच और स्थिति-

57 फीसदी माएं बच्चे के जन्म के बाद काम पर जाना मुश्किल समझती हैं।

– 41 फीसदी माएं कार्यस्थल पर मिलने वाले सहयोग से खुश हैं।

– 70 फीसदी माएं महीने के आखिर में पति के साथ वित्तीय मामलों पर विचार विमर्श करती हैं।

– 91 फीसदी माएं ऐसी हैं जिनके खुद के स्वतंत्र बैंक अकाउंट हैं।

– व्हाट्सएप और फेसबुक पर तकरीबन रोज 2 घंटे व्यतीत करती हैं।

– 76 फीसदी मां कहती हैं कि वह बिना किसी की आज्ञा के अपनी निजी आवश्यकताओं पर खर्च करती हैं।

– 27 फीसदी नाखुश मां को बीते एक साल में एक बार भी प्रशंसा नहीं मिली।

– 90 फीसदी मां को 3 महीने पहले ही प्रशंसा मिली थी। एप्रिसिएशन की कमी उन्हें दुखी रखती है और यही उनकी चिंता का भी कारण है।

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